Saturday, July 26, 2014

पूर्वाभास


उमाकांत चाय की चुस्कियां ले रहे थे। पत्नी उर्मिला दनदनाती कमरे में आई दोपहर में चुस्कियां ले रहे हो। खाना कब खाऔगे?“
जब आपका हुक्म होगा।
मेरी सुनता कौन है?“
कहो, सुन रहा हूं।
क्या कहूं। डाक्टरों ने परेशान करके रखा हुआ है। टेस्ट पर टेस्ट करवाते जाते है। केस को जटिल बना देते हैं। नार्मल काम तो करना ही नही है।
उन्होनें भी पेट पालना है।
हमारा काट कर।
घुमा कर बात न कर, सीधे बता, हुआ क्या?”
तमतमाते हुए उर्मिला बोली – लूट रहे है, आज के डाक्टर, बस बन्दूक सीने पर नही रखते, वर्ना कोई कसर नही छोडी है। अपने घर भरने में लगे है, डराते रहते है, ये हो जाएगा, वो हो जाएगा। ऐसा करना होगा, वो करना होगा। हमने भी बच्चे जने है। मजाल है, किसी डाक्टर ने डराया हो। सीधे, सीधे नार्मल तरीके से बच्चे का जन्म होता था। आज देखो, दुनिया भर की जटिलता और पेचीदापन एक डिलीवरी में बता कर दिल का हार्ट अटैक करवा देते है। कह कर उर्मिला सुबक सुबक कर रोने लगी।
यह देख उमाकांत गंभीर हो गए। तभी कमरे में पुत्रवधू राशी ने धीरे धीरे से प्रवेश किया। सास को सुबक कर रोते हुए देख कर वह खामोशी के साथ दीवान पर लेट गई।
क्या बात है, राशी, सब ठीक है न?“
हां, पापा, ठीक है, कुछ टेस्ट करवाने है। कल करवा लेगें।
फिर इसमें रोने की क्या बात है। टेस्ट करवाने है, हो जाएगें।
उर्मिला तमतमा कर उमाकांत के पास आई और तन कर खडी हो गई – आपका क्या है, दोपहर के समय चाय की चुस्कियां ले रहे हो। हम सडी गर्मी में सजा भुगत रहे हैं। डाक्टरों को तो छोडो, आजकल की डाक्टरनियां भी उस्ताद बन गई हैं। सबने लूटने का धंधा बना रखा है।
गंभीर स्वाभाव के उमाकांत ने धीरे से पत्नी उर्मिला से पूछा – कुछ बता सो सही, आखिर क्या बात है?”
डाक्टर कहती है, कि बच्चा अपने स्थान पर नही है। उल्टा है। केस पेचीदा और जटिल है। टेस्ट करवाने है, फिर अस्पताल में दाखिल करना है।
उमाकांत चुप रहा, कुछ सोचने लगा। उर्मिला बोली – बच्चे उल्टे भी होते है, सीधे भी होते हैं। हमारे समय भी यही होता था, पर मजाल है, किसी डाक्टर ने डराया हो। सब नार्मल तरीके से डिलीवरी होती थी। अब हर केस को ऑपरेशन से करना है। डराते रहते है। दिल को कुछ होता है।
अब उमाकांत ने उर्मिला को दिलासा दिया – कुछ नही होगा। सब ठीक होगा। डाक्टर ने कहा है, तो टेस्ट कल करवाते है। सब नार्मल होगा, डर मत, हमारे समय साधन नही थे। अब विज्ञान ने तरक्की ज्यादा कर ली है। आधुनिक उपकरणों से सब मालूम हे जाता है। समय की मांग है, हमें टेस्ट करवाने चाहिए। घबरा मत पहले जन्म के समय बच्चे और मां की मृत्युदर अधिक होती थी। अब पेचीदा केस भी हल हो जाते है। मृत्युदर भी कम हो गई है।
मृत्युदर की बात सुन कर उर्मिला ने उमाकांत के होठों पर हाथ रख दिया – नही, अशुभ बाते इस मौके पर नही करनी।
फिर वादा कर, ठंडे दिमाग से काम करना है। रोना धोना नही है। कल सुबह टेस्ट करवा कर डाक्टर की सलाह पर चलेगें।कह कर उमाकांत ने उर्मिला को शांत किया।
उर्मिला, अब रोना बंद करके खाने की सोचो। लंच टाइम हो गया है।
साडी के पल्लू से मुंह पोंछ कर उर्मिला रसोई चली गई। उर्मिला के रसोई जाने के बाद उमाकांत ने राशी को समझाया – बेटी, घबराना मत। जैसे डाक्टर कहे, वैसा ही करेगें। पहले और आज के समय में बहुत फर्क है। मैं मानता हूं, कि डाक्टर आजकल व्यापार करते हैं, फिर भी आधुनिक तकनीक के सहारे हमें पहले से कई बीमारियों और जटिलताओं का पता चल जाता है। समय चलते बीमारी का ज्ञान होता है और उचित इलाज, उपचार हो जाता है। पहले बीमारी का पता ही नही चलता था कि कौन सी बीमारी है। मनुष्य चला जाता था। आज बीमारी का पता चलता है और उपचार भी होता है। बेटी तुम चिन्ता न करो। मैं उर्मिला को समझाता हूं।

उमाकांत ने उर्मिला और बहू राशी को तो समझा दिया, परन्तु खुद उसका चित शांत न था। रात को बिस्तर पर लेटने के बाद भी आंखों में नींद नही थी। राशी और आने वाले बच्चे की चिंता थी। सब कुशल मंगल हो जाए। कोई अनहोनी न हो। आधी रात तक मन मस्तिष्क में आशंका उमड घुमड कर रही थी। कब आंख लगी, खुद उमाकांत को नही मालूम। उमाकांत का मकान दो मंजिला है। भूतल में उमाकांत का परिवार और प्रथम मंजिल पर उमाकांत का छोटे भाई रमाकांत का परिवार रहता है। रमाकांत की मृत्यु पांच साल पहले हो गई थी। उमाकांत के कमरे की खिडकी गली में खुलती है। खिडकी के साथ ही उमाकांत का बिस्तर लगा रहता था। दिन में कमरा घर की बैठक और रात में उमाकांत, उर्मिला का शयनकक्ष बनता है।

हां वह स्वपन ही था। अवचेतन मन में उमाकांत को अहसास हो गया था। किसी ने खिडकी खटखटाई। इतनी रात को कौन हो सकता है। तभी खिडकी के बाहर से आवाज आई। उमा भाई खिडकी खोल। स्वर जाना पहचाना था। अवचेतन स्थिति में उमाकांत ने खिडकी खोली। खिडकी के पास रमाकांत खडा था। हांलाकि रमाकांत को परलोक सिधारे पांच वर्ष हो गए है, परन्तु उमाकांत ने कहा, रमा, क्या बात है खिडकी के पास क्यों खडे हो? अन्दर आऔ क्या बात है? यह सुन कर रमाकांत हंस पडा। उमा, इतना उदास मत हो। कोई घबराने की बात नही है। मैं आ रहा हूं। कल जा हंसी खुशी राशी का टेस्ट करवा। यह कह कर रमाकांत चला गया। उमाकांत की नींद खुली। स्वपन पूरी तरह से याद था। थोडा पसीना आ गया उमाकांत को। उसने उर्मिला को नही जगाया। समीप पडे जग से पानी गिलास में डाला और पी कर फिर से करवट बदली। कुछ देर बाद उमाकांत को नींद आ गई। रात देर तक जागने के बाद उमाकांत सुबह देर तक सोता रहा। उर्मिला ने उमाकांत को उठाया – सुनो, क्या बात है आज उठना नही है जल्दी उठो। सुबह की सैर आज कैंसल करो, क्योंकि टेस्ट करवाने हैं, राशी के।
"हां, सैर कैंसल, अभी नहा कर आता हूं। टेस्ट जरूरी हैं।

अस्पताल में राशी के टेस्ट हो रहे थे। बाहर वेटिंग रूम में उमाकांत ने उर्मिला से रात के सपने का जिक्र किया – कल रात सपने में रमा आया था। खिडकी के पास खडा था। कह रहा था, कि वो मिलने आ रहा है।
यह सुन कर उर्मिला चौंक गई – क्या, रमा भाई सपने में क्या कह रहे थे?”
कह रहा था, कि आ रहा है। घबरा मत, राशी के टेस्ट करवा।
यह सुन कर उर्मिला के होठों पर मुस्कान छा गई। अभी तक चिन्तित उर्मिला आराम से कुर्सी पर पैर फैला कर हाथों को सिर के पीछे रख कर कहा – अगर आप का सपना सच्चा है, तब टेस्ट की ठीक रिपोर्ट आएगी।
क्या कह रही हो, अभी तक तो चिन्ता से मरी जा रही थी। अब मुस्करा रही हो।
हां, ऐसे सपने सच्चे होते हैं। आने वाले दिनों की सूचना दे जाते हैं।
तभी राशी के टेस्ट समाप्त हुए। सभी घर आ गए। रात को फिर से सपने में रमाकांत उमाकांत के सपने में आता है। कल रात रमाकांत खिडकी के पास खडा था। आज वह सीधे कमरे में आ गया और उमाकांत को उठा कर कहता है। उठो उमा भाई। उमाकांत उठ कर बैठते हैं तो रमाकांत उमाकांत की गोद में बैठ जाता है। उमाकांत कहते है, यह क्या मजाक है। नीचे उतर। रमाकांत यह सुन कर हंसता है और कहता है, पागल भाई, अब तो रोज गोद में शू शू करूंगा। हंसता हुआ रमाकांत गोद से उतर कर भाग जाता है और सपना समाप्त होता है। सुबह उमाकांत उर्मिला को सपने की बात सुनाते है। सुन कर उर्मिला हंसती हुई कहती है – अब मैं निश्चिंत हूं। सब ठीक होगा। शर्तिया लडका होगा।
टेस्ट रिपोर्ट ठीक आई। रिपोर्ट हाथों में नचाते हुए उर्मिला उमाकंत से बोली सच सच बताऔ। सपने में रमा भाई आए थे।
मैं मजाक नही कर रहा हूं। दो रात लगातार मेरे सपने में रमा आया। कहता है, गोद में रोज शू शू करूंगा। बतममीज कहीं का, बडे भाई से मजाक करता है।
पोता बन कर आ रहा है। दादा की गोद में शू शू करने का पूरा हक बनता है।
तू भी उर्मिला मजाक कर रही है।
हंसती हुई उर्मिला चली गई। दो महीने बाद एक सुन्दर से बच्चे को राशी ने जन्म दिया। नर्स ने बच्चे को उर्मिला की गोद में दिया।
पहला हक दादा का है।
नर्स ने उमाकांत की गोद में बच्चे को दिया। बच्चे ने उमाकांत की गोद में आते ही शू शू कर दिया। उर्मिला ने नर्स को उपहार में पांच सौ रूपये दिए। हंसते हुए उर्मिला ने कहा – रमा भाई ने अपना वादा पूरा किया।
कौन सा?”
शू शू करने का।कह कर उर्मिला ने बात पलटी – देखो, शक्ल रमा भाई से मिल रही है।
सब खुश थे। उमाकांत अवलोकन कर रहा था। सपने में वोही होता है, जो हम सोचते हैं। अक्सर पूर्वाभास दे जाते हैं।  

      

Monday, July 14, 2014

स्वपन

यह मेरे हाथी की मस्त चाल और मात।मुस्कुराते गोपालदास ने शतरंज की बाजी समाप्त की। बाजी हार चुके कृष्ण कुमार ने अपनी बडी लम्बी मूंछ को ताव देते हुए कहा मूंछ तो मेरी लम्बी है, खेलता तू अच्छा है।
यह सुन कर गोपाल दास ने ठहाका लगाया कृष्ण तू अपनी मूंछ पर अधिक ध्यान देता है, उसका आधा समय भी शतरंज मे लगा तो मेरे से अच्छा खेल सकता है।
गोपाल, तेरी मूंछ नही है, तुम इसका महत्व क्या जानो, एक बार रख कर देखो।
आज तक नही रखी, अब क्या रखूंगा।
गोपालदास की उम्र पैसठ साल। रिटायरमेंट के बाद कंसलटेंसी का काम कर रहे है। कृष्ण कुमार फौज के रिटायर कर्नल की उम्र अरसठ साल। वो भी कंसलटेंसी का काम कर रहे है। दोनों पडोसी फुरसत के पल शतरंज खेल कर बिताते है।
गोपालदास का बडा पुत्र रोहित शिकागो, अमेरिका में रह रहा है। पुत्री रीना बैंगलुरू में अपने परिवार के साथ रह रही है। गोपालदास और पत्नी गायत्री अकेले रह रहे है। कभी पुत्र के पास अमेरिका चले जाते है, महीना दो साथ रहने के बाद फिर दिल्ली। कभी पुत्री रीना के पास चले जाते है, दस पंद्रह दिन साथ रह कर वापिस दिल्ली।      
कृष्ण – गोपाल, तुम अमेरिका क्यों नही सेटल हो जाते? तुम्हारा अपना घर है।
कृष्ण, तुम्हे तो बताया है कि रोहित ने लव मैरिज अमेरिकन से की है। पढने गया था, फिर वापिस नही आया। वहीं नौकरी और शादी। बच्चे भी वही के कल्चर में बढे हो रहे हैं। विचारों के साथ खाने पीने का भी अंतर है। हम शुद्ध शाकाहारी, वहां मांस बनता है। कई बार गए, ठंड भी शिकागो में ज्यादा होती है। बर्दास्त नही होती। महीना दो रह कर वापिस आ जाते हैं।
कृष्ण – "यहां बुला लो, अब तो बाहर सेटल वापिस भारत में आ रहे हैं।
बात की थी, नही आना चाहते। बच्चे जहां भी रहें, खुश रहे, बस इतना सा चाहता हूं।
फोन की घंटी से वार्तालाप समाप्त हुआ। फोन गोपालदास के पुत्र रोहित का था। फोन सुन कर खुशी से झूमते हुए गोपालदास ने कहा कृष्ण क्रिसमस कब है?”
कृष्ण - क्रिसमस तो क्रिसमस वाले दिन ही है।
गोपाल संजीदा हो कर – कृष्ण मैं मजाक के मूड में नही हूं। यह बता, क्रिसमस कब आएगा?”
कृष्ण – पच्चीस दिसम्बर को आएगा।
गोपाल ने यह सुन कर कृष्ण का गला पकड लिया – साले गला घोंट दूंगा। ठीक ढंग से बता, कब आएगा।
कृष्ण – यार तू तो सीरियस हो गया। जुलाई का महीना है, पांच महीने बाद समझ ले।
रोहित का फोन था, परिवार के साथ क्रिसमस की छुट्टियों में भारत आ रहा है। भई, वहां तो लम्बी छुट्टियां होती है, क्रिसमस की, और छुट्टियां ले कर दो महीने रहेगें। एक महीना हमारे साथ और एक महीना भारत भ्रमण पर।
कृष्ण – यार तेरे तो मजे ही मजे है।
"हां, सच कहता है, बच्चों के साथ समय का पता नही चलता, वरना तेरे साथ शतरंज खेलते खेलते दिमाग खाली हो जाता है।
कृष्ण – सच बोल, मेरे कारण ही तेरा दिमाग संतुलन में है, वरना खिसका हुआ था।
सच कृष्ण, बच्चों के बिना घर काटने को दौडता है। बच्चों के साथ समय कैसे बीतता है, पता ही नही चलता। पता है कृष्ण, रोहित पढने क लिए अमेरिका गया था। इंडो-अमेरिकन स्कीम में दस छात्रों को चुना गया। सभी छात्रवृति पर गए थे। रोहित का आठवां स्थान था। पढाई के बाद नामचीम कंपनियों में सभी को नौकरी मिली।
कृष्ण – भाग्यशाली हो, होनहार पुत्र के पिता हो।
हां, भाग्यशाली तो हूं, कि पुत्र के भविष्य की कोई चिन्ता नही रही। बस बच्चों की दूरी अवश्य काटती है।
कृष्ण – पूरा जहां तो किसी को नही मिलता। कुछ पाने के लिए कुछ खोना तो है।
"हां, सही सत्य है। नौकरी के साथ वहीं अमेरिकन युवती जेलीना से शादी कर ली।
कृष्ण – सच बताना, कैसा लगा था, शादी की बात सुन कर।
उदास हो गया था। शादी तो उसकी पसन्द से ही करनी थी। रीति रिवाजों के साथ करने की तमन्ना थी। वह पूरी न हुई। लगभग सात महीने बाद रोहित इंडिया आया, तो पार्टी का आयोजन किया। जेलीना को अपनी विवाह की एलबम दिखाई। एक रिश्तेदार की शादी में उसको लेकर गए, तब वह इतनी अधिक उतसाहित हुई, कि रोहित से सात फेरों के लिए राजी किया। रीति रिवाजों के साथ पवित्र अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर विवाह पर भारतीय सभ्यता की मुहर लगाई।
कृष्ण – भाई, भाग्यशाली हो, भारतीय परंपरा वाली फिरंगन बहू मिली।
हां, यह तो है।   

जुलाई से दिसम्बर इंतजार में बीता, फिर बच्चों का आगमन। रोहित, पुत्रवधु जेलीना और पोता विधुर और पोती जेनिफर। पहले बीस दिन दिल्ली में रहे। बच्चों को दिल्ली का कोना कोना दिखाया। हर ऐतिहासिक, धार्मिक स्थल के साथ नई दिल्ली की रौकन और पुरानी दिल्ली की शान। फिर काश्मीर, लेह, हिमाचल, वैष्णो देवी, अमृतसर, आगरा, मथुरा, हरिद्वार, ऋषिकेश, जयपुर, ऊंटी, पांडीचेरी, कन्याकुमारी। दो महीने कैसे बीते, लगता था, कि दो मिन्ट में। दो महीने बाद बच्चे वापिस अमेरिका चले गए और गोपालदास के जीवन में सूनापन फिर से लौट आया। सूनापन हटाने की एक दवाई गोपालदास और कृष्ण कुमार के पास है, वह है शतरंज। रोज शाम को चालों, शह और मात का खेल नोकझोंक के साथ।

एक साल बीत गया।
जनवरी की कडकती ठंडी रात में तापमान एक डिग्री। बंद कमरे में रजाई के अंदर दुबके गोपालदास की नींद खुली। ठंड में पसीना। गला सूख रहा था। पत्नी गायत्री को हाथ लगाया।
तबीयत ठीक नही लग रही है? पसीना आ रहा है। माथे पर हाथ लगा कर देखा, एकदम ठंडा। क्या हुआ?”
गायत्री, पानी दे, फिर बताता हूं।
गायत्री ने गिलास में पानी दिया। पानी पी कर गोपालदास दीवार पर टकटकी लगा कर बोले गायत्री, बत्ती जला।
गायत्री ने बत्ती जलाई।
गायत्री, बहुत अजीब सा सपना देखा। घबराहट के साथ नींद खुली।
क्या देखा?”
सपने में जेलीना नजर आई। मेरे साथ क्नाट प्लेस में घूम रही है। शॉपिंग कर रही है। लंच क्वालिटी रेस्टारेंट में किया। फिर लंच करने के बाद तेजी से मुझसे आगे निकल गई। दो कारों के बीच में कहां अद्दश्य हो गई, मुझे नजर नही आई। मैं आवाज लगाता रह गया, जेलीना, धीरे चलो, मैं तेज नही चल सकता, परन्तु उसने अनसुना कर दिया।
गायत्री – आप परेशान मत हो। सपने तो ऊंटपटांग आते हैं, जिनका कोई सिर पैर होता नही।
हां, होते तो हैं अजीब अजीब सपने। कोई सिर पैर तो होता नही। लेकिन एक बात है। सपने में सिर्फ मैं और जेलीना हैं। रोहित और बच्चे भी नही है। इंडिया अकेली क्या कर रही है?”
गायत्री – अब सो जाऔ।
कुछ देर तक बातें करते गोपालदास और गायत्री सो जाते हैं। अगले दिन से सामान्य कार्यों में व्यस्त गोपालदास सपने को भूल जाते है। एक सप्ताह बाद जेलीना फिर से सपने में आती है। अब की बार गोपालदास शिकागो में है। जेलीना शॉपिंग कर रही है। एक रेस्टारेंट में बैठ कर लंच करते है, फिर से जेलिना तेजी से दो कारों के बीच कही अद्दश्य हो जाती है। गोपालदास आवाज दे रहे है, जेलीना, मुझे यहां के रास्ते नही मालूम। धीरे धीरे चलो। इसके बाद गोपालदास की नींद खुल जाती है। सपना टूट जाता है। इस बार रात में गोपालदास गायत्री को नही उठाते। सुबह नाश्ते के समय सपने की बात गायत्री से करते हैं।
गायत्री – आप रोहित से फोन पर बात कीजिए। मन को तसल्ली हो जाएगी। आपका चित भी शान्त हो जाएगा।
गोपालदास रोहित को फोन मिलाते हैं।
रोहित रोते हुए फोन पर – पापा, कल रात जेलीना का रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया। मैं हॉस्पीटल में हूं। पिछले सप्ताह सडक पार करते हुए जेलीना ऐक्सीडेंट से बच गई थी, परन्तु कल तेज कार ने धक्का दिया, बहुत चोटे आई। पापा, जेलीना अब नही है।


गोपालदास के हाथ से फोन छूट गया। जिस दिन पहला सपना आया, उस दिन जेलीना ऐक्सीडेंट से बच जाती है और दूसरे सपने पर कही दूर चली गई। सपने में जेलीना ने पहले से अपने जाने की सूचना दे दी थी।  

Monday, July 07, 2014

मिसाल


कॉलेज में विकास की सहपाथी रोज थी। विकास दिल्ली के मशहूर व्यापारी दिवान चन्द खन्ना के पुत्र और रोज अमेरिकन दूतावास में कार्यरत उच्च अधिकारी मिस्टर सिंपसन की पुत्री, दोनें में धनिष्ठता थी। अच्छे मित्र थे। एक साथ कॉलेज आना, पढना और क्लब जाना, खेलना। खन्ना परिवार की पटेल नगर में भव्य कोठी के साथ छतरपुर में पांच एकड का फार्म हाउस था। पेज थ्री पार्टियों की जान थे विकास और रोज। कॉलेज की पढाई के बाद विकास परिवार के व्यापार से जुड गया, रोज के पिता का ट्रांसफर अमेरिका में हो गया। रोज पिता के साथ अमेरिका चली गई। विकास की मुलाकात रश्मि से एक पार्टी में हुई। रश्मि शहर के दूसरे मशहूर व्यापारी सहगल परिवार की पुत्री। विकास और रश्मि उस पार्टी में पहली नजर में ही एक हो बैठे और फिर विवाह के पवित्र बंधन के बाद एक हो गए। विकास का पार्टी में आना जाना बना रहा, लेकिन पुत्री राधिका के जन्म के पश्चात रश्मि पार्टियों से कट गई। पुत्री के लालन पालन का पूरा जिम्मा खुद उठाया। नौकरों की कोई कमी नही, लेकिन वे मां का प्यार तो नही दे सकते। परवरिश के लिए वह घर में सिमट गई।

लगभग पांच साल अमेरिका में बिताने के बाद रोज भारत आई। वह एक एनजीऔ से जुडी हुई थी। विकास से मुलाकात हुई। रश्मि पुत्री राधिका की परवरिश में व्यस्त रहती थी। पेज थ्री की पार्टियों में मिलना शुरू हुआ। विकास ने उसके छतरपुर फार्म हाउस में ठहरने की व्यवस्था की। विकास ने अपनी शादी की बात छुपाई और चुपके से रोज से विवाह कर लिया। परिवार के लोग फार्म हाउस आते थे, तो रोज के रहने के लिए साकेत में फ्लैट ले लिया। लेकिन इश्क और मुश्क छुपाए नही छुपते। बात निकलती है और दूर तक पहुंचती है। पेज थ्री के गलियारे से निकल कर मीडिया में भी छा गई। खन्ना और सहगल परिवार में तनाव हो गया। विकास रोज को छोडने के लिए तैयार नही था।

दिवान चन्द को अपनी प्रतिष्ठता की फ्रिक थी। लडका परिवार की इज्जत मिट्टी में मिलाने पर तुला हुआ है। अच्छी भली गृहस्थी पर लात मार कर फिरंगन के पीछे लट्टू की तरह नाच रहा है। कल वापिस अमेरिका चली गई, तब क्या होगा? सोने जैसी पत्नी फिर नही मिलेगी। थोडी देर की अय्याशी के पीछे पूरी जिन्दगी बर्बाद कर रहा है। अपने अनुभवों को पुत्र के सामने रखे, परन्तु पुत्र की आंखों पर से रोज का पर्दा उठ नही रहा था। एक दिन ससुर दिवान चन्द ने रश्मि से कहा – बेटी, विकास नादानी कर बैठा है। लेकिन यह किसी के हित में नही है। खुद उसके हित में भी नही है, अभी वह इस बात को समझ नही रहा है, परन्तु रोज के साथ नाता जोड कर खुद अपने पैर पर कुल्हाडी मार रहा है। मेरा अनुभव कहता है, रोज एक दिन उसे छोड कर कभी भी चली जाएगी, उसे तेरे पास आना ही पडेगा। बात तुमने संभालनी है।

उधर रश्मि के पिता विकास और खन्ना परिवार के खिलाफ हो गए और रश्मि से कहा ऐसे आदमी के साथ जिन्दगी बिताने का कोई फायदा नही, जो दूसरी औरत के चक्कर में अपनी गृहस्थी खराब कर रहा है। तलाक ही एकमात्र उपाय है।

रश्मि के मन मस्तिष्क में अपनी शादी बचाने के साथ अपने, बच्चे के भविष्य, ससुराल और माएके का मान मर्यादा, इज्जत और प्रतिष्ठता भी देखनी है। वह तलाक के बाद विकास को आजाद कर दे, परन्तु क्या वह दूसरा विवाह कर सकेगी। वह ना तो यूरोपियन है ना ही अमेरिकन, जहां तलाक एक खेल है, आज शादी, कल तलाक, परसों फिर विवाह। जितने विवाह कर लो, जितने तलाक कर लो, किसी को फर्क नही पडता। लेकिन भारतीय समाज आज भी उतना उन्नत नही है। रश्मि उलझन में थी कि क्या करे।
उलझन में एक दोपहर आईने के सामने बैठी थी। कंघी हाथ में, पर मन कहीं और विचरित था। कमरे का दरवाजा खुला, आईने में से ही देखा, विकास आया है। रश्मि गुमसुम सी बैठी रही। विकास कुर्सी पर आराम से बैठ गया और रश्मि से बोलाक्या सोच रही हो?”
कुछ नही, तुम कहो, आज दोपहर में घर आए।
पिता जी ने भेजा है, कह रहे थे, तुम्हे मेरे से जरूरी काम है। बोलो क्या काम है?”
रश्मि समझ गई कि ससुर जी ने बात को संभालने वाली जो बात कही थी, उसी कारण विकास को दोपहर के समय घर भेजा, ताकि कुछ बात हो जाए।
हां, बात जरूरी है, तुमने तो घर आना ही छोड दिया, सारा दिन कहां रहते हो, कि पत्नी के लिए भी फुर्सत नही।
देख रश्मि, आज मैं साफ कह रहा हूं, कि मैं रोज के साथ रहूंगा। उसके साथ शादी करूंगा। अब मैं तुम्हारे साथ नही रह सकता। मैं तलाक की सोच रहा हूं। तुम अपनी सहमति दे दो, ताकि तलाक अति शीघ्र हो।
आखिर रोज के साथ विवाह की इतनी जल्दी क्यों है?”
रोज रोज है, तुम उसका किसी भी बात में मुकाबला नही कर सकती। उसमें कुछ अलग सी बात है।
कभी मेरे बारे में भी यही कहते थे।
खुद उसके सामने खडे होकर देखो, अपने आप महसूस कर लोगी।
लेकिन सोच लो, रोज कुर्ते पर सजाने के लिए होता है, गले लगाने के लिए नही।
क्या मतलब है तुम्हारा?”
रोज में कांटे होते है। संभल कर रहना। चुभ गया तो तकलीफ होगी।
यह सुन कर विकास तिलमिला गया और वहां से चला गया।

दिवान चन्द के व्यापार में रश्मि हाथ बटाने लगी। विकास अकसर रोज के साथ रहने लगा। रश्मि के साथ लगभग न के बराबर रहता था। विकास और रोज पेज थ्री पार्टियों में पति पत्नी थे।

दिवान चन्द के कहने के बाद रश्मि ने विकास के दूसरे विवाह को गैर कानूनी घोषित करने के लिए कोर्ट में मुकदमा कर दिया। कोर्ट केस पर रोज विकास से नराज हो गई कि उसने पहली शादी छुपाई। कोर्ट केस शुरू हुआ। सारा मीडिया केस की पल पल की खबर दे रहा था। पेज थ्री सर्कल में हर मशहूर हस्ती हैरान था, कि विकास बिना तलाक के रोज से दूसरा विवाह किया है। बहुत गवाहियां हुई, बहुतों ने रोज के पक्ष में गवाही दी। रश्मि की अहम गवाही पर सारा दामोदार था।   

अदालत खचाखच भरी हुई है। एक इंच भी जगह खाली नही है। वकील, नागरिक और मीडिया सभी को अदालत में स्थान चाहिए। सभी उपस्थित जन खुसर पुसर कर रहे हैं, कि आज केस में क्या होगा? सबकी अपनी अपनी राय है। अटकलों का बाजार गर्म है। कुछ तो शर्त तक लगा रहे है, कि आज क्या बयान दिए जाएगें। ठीक दस बजे जज सविता बजाज अदालत में आई। सभी उपस्थित जन अपनी सीट से खडे हो गए। न्यायाधीश महोदया ने सबको बैठने को कहा। जज महोदया के आने के बाद भी खुसर पुसर कम नही हुई, तब शान्ति के लिए कहा
ऑर्डर ऑर्डर, साईलेन्स प्लीज
सब शान्त हो गए। पहले और केसों की सुनवाई हुई। बहुचर्तित केस सबसे बाद में सुनवाई के लिए आया। सब की उत्सुक्ता रश्मि के बयानों पर थी, कि रश्मि क्या बयान देगी। सबकी नजरे रश्मि पर टिकी हुई है। खन्ना परिवार की बहू रश्मि खन्ना का बयान दर्ज होना है। तभी आवाज लगी।
रश्मि खन्ना
रश्मि जो अब तक एक कोने में बैठी थी, उठ कर जज के सामने विटनेस बॉक्स में आई। आज उसने अपने विवाह का जोडा पहना हुआ है। सुर्ख गुलाबी लहंगा साडी। उम्र सत्ताईस वर्ष, खूबसूरती की मिसाल, रंग गोरा, कद पांच फुट पांच इंच, छरछरा बदन। सभी की निगाहें रश्मि पर टिक गई। वैसे तो खन्ना परिवार पेज थ्री पर छाया रहता है, परन्तु रश्मि पेज थ्री की पार्टियों में कम ही नजर आती है। पुत्री राधिका, जो अब दो वर्ष की हो गई है, उसकी परवरिश में ही रहती है। घर में नौकरों, चाकरों की कोई कमी नही है, लेकिन रश्मि ने राधिका को मां का पूरा प्यार दिया। आज उसका बयान है। रश्मि विटनेस बॉक्स में आई और सच बोलने की शपथ ली।
वकील – आपका नाम?”
रश्मि
वकील – आपका खन्ना साहब से क्या रिश्ता है?”
कुछ कुटिल मुस्कान के साथ रश्मि ने जवाब दिया सब जानते है मेरा खन्ना परिवार के साथ रिश्ता, शायद आपको छोड कर।
वकील झुंझला कर – आपसे जो पूछा है, उसका उत्तर दीजिए। इधर उधर की बातों से अदालत को मत भटकाऐं।  
मुस्कान के साथ – “ठीक है, पूछिए।
वकील – अब आप बताए खन्ना के साथ रिश्ता।
रश्मि ने जज महोदया की ओर मुंह करके कहा – मैं खन्ना परिवार की बहू हूं। दिवान चन्द खन्ना की बहू और विकास खन्ना की पत्नी।
वकील – आप कहां रहती हैं।
खन्ना परिवार की पुरानी पुशतैनी पटेल नगर वाली कोठी में अपने पति, बेटी, सास ससुर और छोटी ननद के साथ।
वकील – आप झूठ बोल रही हो। विकास खन्ना आप के साथ पटेल नगर वाली कोठी में नही रहते है।
वकील साहब, मैं झूठ क्यों बोलूगी? मैं अपने पति विकास खन्ना के साथ पटेल नगर वाली कोठी में ही रहती हूं। मैं आपको पहले भी कह चुकी हूं और वोही बात फिर कह रही हूं। कोठी में हमारे साथ विकास के माता पिता और छोटी बहन भी रहते है। हमारा संयुक्त परिवार है।
वकील – सामने जो खडी है, उनको जानती हैं क्या आप?”
यदि आपका ईशारा सामने खडी महिला, जिसका नाम रोज है, जानती हूं।
वकील – विकास खन्ना आपके साथ नही रहते हैं, वो रोज के साथ छतरपुर वाले फार्म हाउस में रहते है।
छतरपुर में हमारा फार्म हाउस है, हम अक्सर आते जाते रहते है, लेकिन निवास हमारा पटेल नगर में ही है, क्योंकि ऑफिस और दुकान चांदनी चौक में हैं, छतरपुर काफी दूर पडता है, इसीलिए निवास पटेल नगर में ही है। छतरपुर हम छुट्टियों में ही रहते है। हर शनिवार फार्म हाउस जाते है और रविवार रात को वापिस पटेल नगर आ जाते है। आपने यह क्यों पूछा, कि रोज छतरपुर वाले फार्म हाउस में रहती है। हमारा उससे कोई रिश्ता नही है।
वकील – सबको मालूम है, कि रोज के साथ आपके पति विकास ने विवाह किया है आपको घर से बेदखल कर दिया है।
रश्मि ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा आप झूठ बोल रहे है। मैं अभी भी खन्ना परिवार का अभिग्न अंग हूं। मैं, विकास, हमारी बेटी राधिका पटेल नगर वाली कोठी में एक साथ रहते है। रोज के साथ विवाह की बात एकदम झूठ है। आपके पास क्या कोई सबूत है?”
वकील – मीडिया में रोज चर्चा हो रही है, पेज थ्री में सभी की जुबान पर यह चर्चा है।
वकील साहब, अफवाह फैलाने वाले देश के दुश्मन है। आप उनमें कब से शामिल हो गए है।
यह सुन कर अदालत में एक ठहाका सा गूंजा। वकील साहब का मुंह उतर गया। लोगों की खुसर पुसर शुरू हो गई। ऑर्डर ऑर्डर कह कर जज महोदया ने सब को शान्त किया।
वकील – रोज का कहना है, कि विकास ने शादी की है और दोनों एक साथ छतरपुर फार्म हाउस में रह रहे है।
वकील साहब, छतरपुर में सिर्फ दो नौकर रहते है, फार्म हाउस की देखभाल के लिए। हम, अर्थात विकास, मैं, हमारी पुत्री राधिका, मेरे सास-ससुर, छोटी ननद हर छुट्टी वाले दिन फार्म हाउस जाते हैं। हमारे रिश्तेदार, जिसमें मेरे माएके, मेरी ससुराल के सदस्य छुट्टी के दिन हमारे साथ होते हैं। आप फार्म हाउस के दोनों नौकरों का बयान भी सुन चुके है, सभी का यही कहना है, कि रोज वहां नही रहती है। यदि उसने विकास के साथ विवाह किया है, तो वह गैरकानूनी है। एक पत्नी के होते दूसरे विवाह की अनुमति न तो हिन्दू समाज देता है, न ही हिन्दू मैरिज एक्ट देता है।
इतना सुनने के बाद वकील साहब ने और कोई प्रश्न नही पूछा। रश्मि अपनी सीट पर बैठ गई। मीडिया को उम्मीद थी कि रश्मि पति विकास से विरूद्ध बयान देगी, और रोज केस जीत जाएगी। विकास और रश्मि का तलाक हो जाएगा, परन्तु ऐसा नही हुआ। रोज अपनी शादी कानूनी साबित नही कर सकी। हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी। रश्मि ने मिसाल पेश की है। आधुनिक भारतीय महिला होते हुए भी उसने भारतीय मूल्यों, संस्कारों को अपनाते हुए अपने विवाह के समय लिए वचनों का मान किया है। अपना, अपने परिवार और ससुराल का सिर गर्व से ऊंचा किया है। सभी उसकी तारीफ कर रहे थे। रश्मि गरिमाशाली मुस्कान के साथ अपने सास, ससुर के साथ कार में बैठ कर पटेल नगर कोठी की ओर रवाना हुई। पीछे कार में विकास के साथ उसकी छोटी बहन थी। रोज अकेली रह गई।
विकास के कानों में रश्मि की कही बात बार बार गूंज रही थी। रोज के साथ कांटे होते है। रोज को गले नही लगाया जाता। आज कांटा चुभ गया। विकास को मजबूरन घर जाना पडा।
कुछ दिनों के बाद रोज वापिस अमेरिका चली गई। विकास रश्मि के साथ आंख नही मिला सका। दिवान चन्द ने व्यापार की बागडोर रश्मि को दे दी। विकास रह गया सिर्फ प्यादा बन कर।   



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