Tuesday, December 29, 2015

दर्द



अनिल अग्रवाल एक सफल और जाने माने उद्योगपति हैं। सोशल सर्कल में हमेशा मौजूद रहते हैं और हर कार्य में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। चारों तरफ उनके नाम के चर्चे होते हैं। अच्छे और बढ़िया कपडे पहन कर घर से बाहर निकलते हैं। घर से बाहर की तो बात निराली है, घर में भी अच्छे कपडे पहन कर रहते हैं। कोई उनके घर जाए, उनको देख कर यही सोचेगा कि शायद कहीं बाहर जाना है। हर व्यक्ति अनिल अग्रवाल के कपडे पहनने के तौर तरीको और समझ की तारीफ करता कि कपडे कब, कहां और कैसे पहनने है सिर्फ अनिल अग्रवाल से पूछे और कपड़ों की शिक्षा ले। वे अपने आप में संस्थान हैं। चुस्त और फिटिंग वाले कपड़ों में अनिल अग्रवाल रहते हैं। जहां भी वे निकलते, लोग देखते रह जाते। किस दुकान, शोरूम से कपडा लेते हैं, किस दर्जी से सिलवाते हैं, हर कोई जानने का प्रयास करता।

अनिल अग्रवाल सोहन लाल दर्जी से अपने कपडे सिलवाते। अनिल अग्रवाल की बदौलत सोहन लाल अब कोई मामूली दर्जी नहीं रहा। एक बहुत बड़ा शोरूम खोल लिया 'सोहन लाल एंड संस' सिर्फ अमीर व्यक्ति ही उसके शोरूम में जाने की सोचता है। गरीब को तो छोड़ो, मध्यम वर्ग भी उसके दाम सुनकर शोरूम से बाहर जाते हैं। कम से कम बीस कारीगर उसके यहां काम करते हैं, परंतु अनिल अग्रवाल के कपड़ों का नाप सोहन लाल खुद लेता हैं। सोहन लाल के लिए गर्व की बात है कि अनिल अग्रवाल का भरोसा सिर्फ सोहन लाल पर है।

अनिल अग्रवाल का हर रोज़ व्यस्त जाता है। व्यापार और पार्टियां, सुबह छः बजे से रात बारह बजे तक व्यस्त रहने वाले सफल उद्योगपति को अक्सर अपने बच्चों से भी बात करने की फुरसत नहीं होती थी।

अनिल अग्रवाल ने मात्र चालीस की छोटी सी उम्र में सफलता की सारी सीढ़ियां चढ़ ली और चोटी पर राज्य स्थापित कर लिया।

पिछले दो दिन से अनिल अग्रवाल की गर्दन में दर्द हो रहा है। समय की व्यस्तता के कारण उसने अधिक ध्यान नहीं दिया। रविवार की सुबह कोई चार बजे का समय था। दर्द के कारण अनिल उठ बैठे और बत्ती जलाई। दवाई के डिब्बे से दर्द निवारक गोली निकली और खाई। आवाज़ सुन कर पत्नी भी जाग गई। पति को उठा देख समझी कि उठने का समय हो गया है, क्योंकि अनिल सुबह छः बजे उठ जाते हैं।

पत्नी को उठते देख अनिल ने कहा "सौ जाओ, अभी तो चार बजे है।"
"आप क्यों इतनी जल्दी उठ गए?"
"गर्दन दुःख रही है। गोली खाई है, ठीक हो जाएगा।"
"बाम लगा दूं?"
"नहीं, दवाई ली है, ठीक हो जाएगा।"

थोड़ी देर में दर्द कम हुआ और अनिल को नींद गई। आज बहुत वर्षो के बाद अनिल बहुत देर तक सोते रहे। लगभग आठ बजे उठे।

पत्नी अनिला ने पति अनिल से तबियत पूछी। अनिल ने कहा कि अब तो ठीक है। दो चार दिन से कभी-कभी हल्का-हल्का दर्द महसूस हुआ, परंतु आज सुबह बहुत तेज था। आज तक यह कभी नहीं हुआ। खैर कोई बात नहीं, अब ठीक है। रविवार का दिन है, दिन में कुछ खास काम नहीं है। रात पार्टी में जाना है। अभी थोडा आराम कर लेता हूं।

नहाने के बाद अनिल अग्रवाल ने कपडे बदले। कुछ लोगों से घर पर मुलाकात की और ऑफिस का काम किया। घर पर ही एक छोटा ऑफिस बना रखा है और सुबह आठ बजे तो दोपहर दो बजे तक स्टाफ के दो जनों की ड्यूटी लगती है। चाहे रविवार हो या कोई दूसरी छुटी का दिन, कम से कम एक जन तो ऑफिस में अवश्य उपस्थित रहता है। बारी-बारी से साप्ताहिक अवकाश रहता है उनका। ऑफिस में काम करते हुए फिर से गर्दन में दर्द महसूस हुआ। पत्नी अनिला से कहा "मालूम नहीं, आज दर्द रह रह कर क्यों उठ रहा है।"

"इसको नज़र अंदाज़ करो। मैं डॉक्टर से बात करती हूं। आप आराम कर लो।" अनिला ने डॉक्टर को फ़ोन किया और घर आने के लिए कहा। थोड़ी देर में डॉक्टर गुप्ता अनिल के घर गए और चेकअप करने के बाद कहा।

"अनिल, अभी तो टेस्ट नहीं हो सकेंगे। मैं दवा लिख देता हूं। तुम दवा लो, कल सुबह एक्स-रे और स्कैन करवाते हैं। वैसे घबराने की कोई बात नहीं है। दवा से थोड़ी नींद अधिक आएगी, इसलिए आज की पार्टी रद्द कर दो और घर बैठ कर आराम करो।"

डॉक्टर दवा लिख कर चला गया। दवा के असर से थोडा दर्द कम हुआ और नींद अधिक आई। रात की पार्टी में अनिल नहीं गया। सोशल सर्कल में चर्चा होने लगी कि तेज जीवन शैली के कारण अनिल अग्रवाल बीमार हो गए। अब उनका सोशल सर्कल बंद। लोगों को तो मसाला नमक मिर्च लगा कर बात का बतंगड़ बनाने की आदत है। गर्दन में दर्द हुआ और सबने दिल का दौरा तक कह दिया।

अगले दिन सुबह पहले एक्स-रे और फिर सीटी स्कैन हुआ। दोनों की रिपोर्ट सामान्य आई। रिपोर्ट सामान्य आने के बाद एमआरआई भी डॉक्टर ने करवाया। उसकी रिपोर्ट भी सामान्य आई। डॉक्टर ने कहा कि घबराने की कोई आवश्कयता नहीं है। जब रिपोर्ट सामान्य है तो दर्द निवारक दवा लेते रहो और साथ थोड़ा गर्दन का व्यायाम करने की सलाह दी। पत्नी अनिला ने योगा की सलाह दी और एक योगा अध्यापक की नियुक्ति कर दी। अनिल अग्रवाल योगा भी करने लगे। दवा, योगा और गर्दन के व्यायाम से कोई फर्क नहीं पड़ा। कभी दर्द कम हो जाता तो कभी अधिक। तीन महीने बीत गए। दर्द स्थाई रूप से विदा नहीं हुआ, जिस कारण अनिल अग्रवाल का सोशल सर्कल छूट गया। सोशल सर्कल में अफवाह का बाजार गर्म हो गया कि अनिल अग्रवाल चंद महीनों का मेहमान है। एक गर्दन के दर्द, जिसकी डॉक्टर कोई वजह नहीं ढूंढ सके, सभी टेस्ट की रिपोर्ट सामान्य आई। अनिल खुद परेशान और हैरान था। लोगों ने उसे मृत्यु शैया पर पहुंचा दिया। अनिल अग्रवाल के कानों में जब ये बातें पहुंची, उसे बहुत गुस्सा आया और लोगों की बकवास के कारण उसने सोशल सर्कल छोड़ दिया। वह सिर्फ ऑफिस और घर तक सीमित हो गया।

अनिल की परेशानी देख डॉक्टर ने कुछ दिन आराम करने की सलाह दी कि काम काज की चिंता छोड़ किसी हिल स्टेशन पर आराम करें। पत्नी अनिला को सुझाव अच्छा लगा। गर्दन दर्द से परेशान अनिल ने काम के बोझ को छोड़ हिल स्टेशन पर एक महीना बिताने की सोची।

"कब चले, तैयारी भी करनी है।" अनिला ने पूछा।
"अगले महीने पहली से आखरी तारीख तक। पूरा महीना आराम, मैं और तुम।" अनिल ने रोमांटिक अंदाज़ में कहा।
"बहुत रोमांटिक हो रहे हो, क्या बात है? अनिला ने अनिल के समीप आकर पूछा।
"काम के चक्कर में अपनी ज़िन्दगी ही भूल गए कि रोमांस क्या होता है। एक महीना सिर्फ रोमांस और कुछ नहीं।" कह कर अनिल ने अनिला के होठ चूम लिए।
"अनिला इस गर्दन दर्द के कारण बहुत दिन हो गए, नए कपडे नहीं बनवाये। कुछ कपडे बनवा लेता हूं।"
"तुम कल बनने दे दो। सोहन लाल भी सिलने में आजकल बहुत समय लगा देता है। उसको हिदायत देना कि इस बार जल्दी चाहिए।" अनिला ने अनिल से कहा।

अगले दिन अनिल के साथ अनिला भी सोहन लाल की दुकान गई। दुकान पर सोहन लाल नहीं था। वह किसी शोक सभा में गया था। दुकान पर सोहन लाल का पुत्र मोहन लाल था।
"आइए, अंकल, इस बार बहुत दिनों में आए हैं।" अनिल को देख कर मोहन लाल ने स्वागत किया।
"सोहन लाल किधर है, नज़र नहीं रहा।"
"जी अंकल, वे शोक सभा में गए है।"
"कुछ कपडे बनवाने हैं।"
"अंकल जी, मैं नाप लेता हूं। आप अपनी पसंद बताएं।"
"ठीक है, इस बार तुम ले लो, लेकिन तुम्हे पता है कि मैं नाप, फिटिंग्स का बहुत ख्याल रखता हूं।"
"आपकी पसंद के मुताबिक कपडे बनेगें।"
"ठीक है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि कपडे एक दम फिट और मेरे टेस्ट के मुताबिक होने चाहिए।" अनिल अग्रवाल ने मोहन लाल की सख्त हिदायत दी।
"अंकल, आप बेफिक्र रहें। जैसा आप कहेगें, कपडे वैसे ही बनेंगे। आपको शिकायत का कोई मौका नही मिलेगा।" कह कर मोहन लाल अनिल अग्रवाल के कपड़ों का नाप लेने लगा। गले का नाप लेते समय अनिल अग्रवाल को दर्द हुआ।
"उफ़।"
"क्या हुआ अंकल?"
"वही गर्दन का दर्द, जिसने परेशान किया हुआ है।"
नाप लेते लेते मोहन लाल का हाथ रुक गया। उसने बड़े ध्यान से अनिल अग्रवाल के कपड़ों की बनावट और फिटिंग्स देखी।

"अंकल आप बैठिये।"
दर्द के कारण अनिल अग्रवाल कुर्सी पर बैठ गए। दो मिनट बाद मोहन लाल ने अनिल अग्रवाल से कहा।
"अंकल, दर्द किस कारण होता है?"
"दुनिया भर के टेस्ट हो गए, कारण आज तक मालूम नहीं हुआ।"
"अंकल यदि टेस्ट में कुछ नहीं आया है, तो एक बात कहूं।"
"कहो।"
"अंकल, आप अपने कपड़ो का स्टाइल बदले। कालर मुझे लगता है अधिक टाइट है। थोडा ढीला हो तो फर्क पड़ सकता है। तंग गले के कपडे आप वर्षों से पहन रहे हैं। उनका गले की नसों पर दबाव पड़ने से दर्द हो सकता है। इस बार आप थोड़े ढीले कपडे पहने, हो सकता है, फर्क पड़े।"

मोहन लाल की बात अनिल अग्रवाल समझ नहीं सका। "जब डॉक्टर वजह नहीं मालूम कर सके, तुम वजह बता रहे हो और वो भी बेतुकी सी।"

अनिला को मोहन लाल की बातों में वजन लगा। "सुनो, एक जोड़ी कपडे मोहन लाल के हिसाब से थोड़े ढीले बनवा वो। हो सकता है, इतने वर्षो से तंग कपड़ों का दबाव गले की नसों पर पड़ा हो। जवानी में दर्द नही हुआ, अब उम्र बढ रही है, हो सकता है कि अब नसें भी दबाव नही सह पा रही होंगी।"
"लोग क्या कहेंगे, ढीला हो गया अनिल अग्रवाल।"
"अनिल तुम अपनी सेहत देखो। लोग तो पता नहीं क्या क्या कह रहे हैं। इतने नुक्से आजमा लिए, एक और सही।" अनिला ने अनिल पर दबाव डाला।

पत्नी की बात रख कर उसने दो जोड़ी कपडे थोड़े ढीले बनवाये और बाकि अपने पुराने हिसाब से।

महीना बीत गया और पहली तारीख गई। अनिल और अनिला हिल स्टेशन को कूच कर गए। अनिला ने अनिल के खान-पान के साथ कपड़ों पर विशेष ध्यान दिया। उसने अनिल को तंग फिटिंग्स वाले कपडे नहीं पहनने दिए। दर्द निवारक दवाइयां कम कर दी। गर्दन के व्यायाम बार बार अनिल से करवाती। एक महीने में अनिल के गर्दन का दर्द दूर हो गया। थोडे ढीले कपडों ने कमाल कर दिया और उसकी गर्दन का दर्द दूर हो गया। मोहन लाल का मशवरा काम कर गया।

"अब कैसा महसूस करते हो?"
"जादू हो गया लगता है। अब दर्द बिलकुल नहीं होता। दवा भी लेनी छोड़ दी है।"
"जो काम डॉक्टर नहीं कर सके, योगा वाले नहीं कर सके, वो काम एक दर्जी ने कर दिया।" अनिला ने अनिल के गालों को सहलाते हुए गर्दन पर हलके से हाथ फेरा "देखा मेरे प्यारे कोमल हाथों का जादू।"
मुस्कुराते हुए अनिल ने अनिला को अपनी बाहों के आलिंगन में बांध लिया और अनिला बाहों में झूल गई।



जगमग

दिये जलें जगमग दूर करें अंधियारा अमावस की रात बने पूनम रात यह भव्य दिवस देता खुशियां अनेक सबको होता इंतजार ...