Wednesday, February 15, 2017

शरण अपनी में रख लीजे

शरण अपनी में रख लीजे, दयामय दास हूं तेरा,
तुम्हें तजकर कहां जाऊं, हितू को और है मेरा।
शरण अपनी में रख लीजे।।

भटकता हूं मैं मुद्दत से, नही विश्राम पाता हूं,
दया की दृष्टि से देखो, नही तो डूबता बेडा।
शरण अपनी में रख लीजे।।

सताया रोग द्वेषों का, तपाया तीन तापों का,
दुखाया जन्म मृत्यु का, हुआ तंग हाल है मेरा।।
शरण अपनी में रख लीजे।।

दुखों को मेटने वाले, तुम्हारा नाम सुन कर मैं,
शरण में गिरा अब तो, भरोसा नाथ है तेरा।
शरण अपनी में रख लीजे।।

क्षमा अपराध कर मेरे, फकत अब आस है तेरी,
दया तू मोहन पर करले, बना ले नाथ निज चेरा।
शरण अपनी में रख लीजे।

शरण अपनी में रख लीजे, दयामय दास हूं तेरा,
तुम्हें तजकर कहां जाऊं, हितू को और है मेरा।



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