Monday, May 29, 2017

रक्षक


कितना खुश है तू आज
मेरे हाथों में सुरक्षित है
ऊंची उड़ान भर तू
तभी अपने से ऊंचा किया है
कोई शंका मत रख तू
मैंने अपनों को सहारा दिया है
मत डर ऊंची उड़ान भरने से
मत डर नीचे गिरने से
ऊंचा औऱ फिर नीचे
यही जीवन की गहराई है
मैं संपूर्ण जगत का तात
सब में मैं बसता हूं
एक बार अपना ले तू मुझे
तेरा रक्षक मैं ही हूं


Friday, May 26, 2017

मनमानी

मन की करो मनमानी करो
कुछ अपनी कहो कुछ मेरी सुनो
दिल तो पागल है
मन को भटकाता है
मन को शान्त रखो
दिल मान जाता है
मैं हूं तेरा तू है मेरी
फिर क्यों करें मनमानी
ज़िन्दगी साथ चलने का नाम है
मनमानी अकेले चलने का काम है


Saturday, May 20, 2017

बोझ


सुबह काम पर जाने का बोझ है
सारा दिन काम करने का बोझ है
शाम को तेरी इंतजार का बोझ है
रात को ग़मों का बोझ है

नींद उड़ जाती है बोझ के मारे
घुट कर जी रहा हूं बोझ के मारे
गठरी बन गई ज़िन्दगी बोझ के मारे
बस फरयाद करता हूं बोझ के मारे

खुदा कुछ तो रहम कर अब
गठरी का बोझ कम कर अब
सोचता हूं खूंटी पर टांग दूं अब
अपने पास ही बुला ले अब


अफवाह


गुमनाम सी जिंदगी गुजार रहा था
एक अफवाह उडी मैं मशहूर हो गया
तुम जो आई मेरे जीवन में
फूल वादियों में खिल उठे
वो कौन है जो अफवाह उडाता है
दो हंसों के जोड़े को अगल कर जाता है
खता कुछ नही बस अफवाह का शिकार हो गए
अफवाह के संग उड़ते बहुत दूर हो गए


Friday, May 19, 2017

नादान

नादान दिल था तुझ संग प्रीत लगा ली
सुनी मन की बात तुझ संग चल दी
रास आई यह जिंदगी कुछ नही
नादान दिल को समझाया कुछ नही
कुछ रुकी हुई चाह अभी हैं बाकी
तुझ संग मिलने की आस है बाकी
फिर से मौसम बहार का आएगा

नादान दिल फिर से बहल जाएगा

Wednesday, May 17, 2017

सहारा


थोड़े दिनों से सरला को आंखों की तकलीफ होने लगी। दिखना कुछ कम हो गया तब चश्मा लगा लिया। चश्मा लगाने से काफी आराम मिला। उम्र पचपन की हो गई और बच्चों का विवाह हो गया। घर में दो पुत्रवधुएं होने के बावजूद घर के सभी काम सरला ही करती है। आजकल सभी लड़कियां पढाई के पश्चात नौकरी करती है और रसोई से तौबा ही रहती है। वो पुराना समय कुछ और था। बीए की पढाई के पश्चात तुरंत विवाह हो जाता था। उस समय घर के काम काज में लड़की का दक्ष होना अति अनिवार्य होता था। सरला पढाई में अव्वल थी और घर के कार्यों में भी। विवाह के बाद उसने पति को कभी रसोई में घुसने नही दिया।

आजकल के समय की मांग नौकरी करने वाली लड़की ही है। कमाऊ लड़की सबको पुत्रवधु के रूप में चाहिए। उसके दोनों पुत्रों की पसंद ही नौकरी करने वाली लड़की रही।

सुबह छः बजे से सरला रसोई संभालती है। पति, पुत्रों और पुत्रवधुओं का नाश्ता और लंच के टिफ़िन उसको बोझ नही लगता था। वह कर्तव्य समझ बिना नागा सप्ताह के सातों दिन सब की खुशियों का ध्यान रखती थी।

एक दिन दोपहर को अपने मायके जाने के लिए बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही थी। सरला को बस के नंबर नही पढ़े जा रहे थे। चश्मे के साथ भी दिक्कत हुई। सामने से दो बसें निकल गयी और सरला को पता नही चला। एक प्राइवेट बस के कंडक्टर ने आवाज लगाई "साकेत साकेत" तब उसे अहसास हुआ कि बस के बड़े-बड़े नंबर भी उसे नजर नही रहे है।

रात को पति सुभाष से इस विषय में बात की।
"सरला डॉक्टर से चेकअप करवाते हैं। शनिवार को चलते हैं। सही नंबर का चश्मा होगा तो कोई दिक्कत नही आएगी।"

शनिवार सरला की आंखों की जांच के लिए आंखों के डॉक्टर के पास गए। जांच के पश्चात मालूम हुआ कि सरला की दोनों आंखों में मोतियाबिंद है और ऑपरेशन करवाना होगा। पहले एक आंख का ऑपरेशन होगा जिसमें मोतियाबिंद अधिक है फिर अगले महीने दूसरी आंख का ऑपरेशन होगा।

घर पर बच्चों को सरला की आंखों के ऑपरेशन के बारे में बताया। आंख के ऑपरेशन के बाद कुछ दिन सरला को आराम चाहिए। रसोई और चूहले से दूर रहना होगा इसलिए दोनों पुत्रवधुओं से बारी-बारी रसोई संभालने को कहा। दोनों पुत्रवधुओं ने एकदम मना कर दिया कि वे ऑफिस से छुट्टी नही ले सकती और रसोई का झंझट उनके बस का नही है।

यह सुन सरला की आंखों में आंसू गए। सुभाष कुछ क्रोधित हो गया।
"कुछ तो शर्म करो। सारा दिन सरला रसोई में बैल की तरह जुती रहती है और तुम दो चार दिन दो रोटी नही खिला सकती। मैं ऑफिस से छुट्टी लेने की नही कह रहा सिर्फ समय निकाल कर सहयोग करने के लिए कह रहा हूं। मैं भी ऑफिस में काम करता हूं। ऑफिस के तौर-तरीके सब जानता हूं। तुम्हे पुत्रवधु नही पुत्री समझती है और तुम सौतेला बर्ताव कर रहे हो।"
पिता के बात सुनकर दोनों पुत्रों ने पुत्रवधुओं का समर्थन किया और नौकर रखने की सलाह दी। इससे पहले सुभाष कुछ कहते सरला ने सुभाष का हाथ पकड़ कर शांत रहने को कहा।

ऑपरेशन के दिन सरला की आंखें आंसुओं से भर गई कि घर के काम करना तो दूर, एक दिन की सांकेतिक छुट्टी करके अस्पताल तक भी नही ले गई। सुभाष ने सरला को गले लगा कर प्यार किया।
"पगली रोना नही है, मैं तेरे साथ हूं न।"
"बस तुम्हारा ही तो सहारा है।"


जगमग

दिये जलें जगमग दूर करें अंधियारा अमावस की रात बने पूनम रात यह भव्य दिवस देता खुशियां अनेक सबको होता इंतजार ...