Thursday, June 01, 2017

इश्क की गली

इश्क कहो या प्रेम कहो
दोनों जुदा नही एक हैं
मैं हूं इश्क का फरिश्ता
यह इंसान की जरुरत है
इश्क की गली वासना की नही
यह तो इबादत की गली है
इस गली का हर मकान
पूजा का घर है
यहां हवस नही
इश्क की पूजा होती है
आओ मीरा की गली घूमो
आखरी मकान मेरा है


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