Tuesday, June 20, 2017

शौषण किसका


ऑफिस में एक साथ काम करते सहपाठियों में घनिष्ठा स्वाभाविक है। एक प्रोजेक्ट में पूरे दिन चर्चा और काम में डूबे कर्मचारी ऑफिस को ही घर समझते हैं। आपसी मित्रता बढ़ती है। घर तो सिर्फ सोने ही जाते है। देर रात तक एक साथ काम करते हुए पुरुष और महिला सहपाठी भी एक दूसरे के नजदीक जाते हैं। कुछ ऐसा ही ऋतु और विकास के बीच हुआ।

ऋतु इंटीरियर डिज़ाइनर और विकास प्रोजेक्ट इंजीनियर एक होटल प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। घंटो एक दूसरे से प्रोजेक्ट के सिलसिले पर बातें करना और होटल निर्माण पर निरीक्षण करते हुए दोनों एक दूसरे के बहुत अधिक नजदीक गए। अक्सर होटल निर्माण स्थल पर जाना होता। कभी तो एक सप्ताह तक होटल स्थल पर निरीक्षण हेतु रूकना पड़ता। दिन तो निर्माण स्थल पर गुजरता, रात कंपनी के गेस्ट हाउस में।

उस दिन तेज बारिश के कारण होटल निर्माण का कार्य रुक गया। ऋतु और विकास गेस्ट हाउस गए। विकास ने रास्ते से बीअर की छः बोतल खरीदी।
"छः बोतल क्या करोगे?" ऋतु ने विकास से पूछा।
"बारिश हो रही है। पीने के लिए खरीदी है।"
"सारी पिओगे?"
"तेरे लिए भी है। आधी तेरी आधी मेरी, वैसे व्हिस्की भी गेस्ट हाउस में रखी हुई है।"
"साथ मे लेकर चलते हो।"
"जो ब्रांड में पीता हूं। यहां जंगल मे मिलता नही है इसलिए साथ स्टॉक रखना पड़ता है।"

गेस्ट हाउस में टीवी पर म्यूजिक चैनल देखते हुए विकास ने व्हिस्की की बोतल खोली। फोन पर पत्नी वीना से बातें करते हुए व्हिस्की की चुस्कियां ले रहा था। ऋतु ने शाम का स्नान किया और नाइटी पहन कर आई। फोन पर पत्नी से बातें करते हुए उसने ऋतु को देखा औऱ देखता रह गया। ऋतु गजब की सुंदर लग रही थी। बाहर तेज बारिश की बौछारों के साथ तेज हवा चल रही थी। खिड़की हवा के वेग से खुल गयी। ऋतु खिड़की बंद करने लगी। हवा के झोंको से उसकी नाइटी झूल उठी और घुटनों से ऊपर उठ गई। ऋतु की नग्न टांगे देख विकास उत्तेजित हो गया। गट से व्हिस्की का गिलास खत्म। खिड़की बंद करके ऋतु विकास के सामने कुर्सी पर बैठ गई।

"किससे बात कर रहे थे?" ऋतु ने विकास से पूछा।
"अपनी जान से बात कर रहा था।" विकास ने पत्नी से बात समाप्त कर फोन काटा।
"याद रही है?"
"इस कातिल मौसम में बस याद ही कर सकते है।" कह कर विकास ने व्हिस्की का एक पेग बनाया और दूसरा पेग बना कर ऋतु की ओर बढ़ाया। ऋतु ने गिलास होंठो से लगाया।

विकास और ऋतु आमने सामने की कुर्सियों पर बैठे थे। कंपनी के गेस्ट हाउस में उन दोनों के अलावा कोई नही था। इस बार गेस्ट हाउस का केयरटेकर जो रसोइया भी था छुट्टी पर अपने गांव गया हुआ था। विकास ऋतु के समीप कर बैठ गया। उसके एक हाथ मे पेग था और दूसरा हाथ ऋतु के कंधे पर रखा। ऋतु कुछ नही बोली और व्हिस्की के छोटे-छोटे घूंट लेने लगी। विकास हाथ से ऋतु का कंधा सहलाने लगा और ऋतु से सट गया। विकास का हाथ कंधे से कमर पर गया और ऋतु को अपनी और खींचा। ऋतु के हाथ से व्हिस्की का गिलास छटक गया। विकास ने व्हिस्की का गिलास मेज पर रख कर ऋतु को अपनी बाहों में भर कर होठों पर चुम्बन जड़ दिया।

बाहर तेज गति से वर्षा रुकने का नाम नही ले रही थी औऱ गेस्ट हाउस के अंदर विकास औऱ ऋतु दो जिस्म एक जान हो गए। एक दूसरे में समाए दुनिया से बेखबर प्रेमालाप के अंतिम छोर पर पहुंच गए।
खाने की सुध, पीने की खबर औऱ जिस्म का होश। बस खोया जोड़ा आज जैसे वर्षो बाद मिला हो, सदियों का हिसाब चुकता करना है। मदहोश थक कर चूर दोनों ने एक दूसरे को देखा औऱ लिपट गए।
सारी रात दोनों एक दूसरे के जिस्म से खेलते रहे। बारिश पूरी रात होती रही और सुबह भी नही थमी। रुक-रुक कर बारिश तेज हो जाती। तेज बारिश के साथ तेज हवा भी चल रही थी। होटल स्थल पर जलभराव के कारण निर्माण कार्य रुक गया। विकास और ऋतु गेस्ट हाउस में एक दूसरे की बाहों में कैद थे।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने विकास से रिपोर्ट लेने के लिए फोन किया। एक दूसरे की बाहों में कैद विकास और ऋतु दुनिया से बेखबर हो गए थे। दोनो के मोबाइल फोन की बैटरी समाप्त हो चुकी थी। होटल साइट पर फोन करके मैनेजिंग डायरेक्टर ने विकास से बात करवाने को कहा। होटल साइट से स्टोर अफसर गेस्ट हाउस पहुंचे।
सड़क पार स्थित ढाबे से विकास ने खाना मंगवाया।  ढाबे वाला खाना देकर गेस्ट हाउस का दरवाजा भेड़ कर चला गया। स्टोर अफसर गेस्ट हाउस पहुंचें दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था। बेधड़क अंदर पहुंचे और वहां का दृश्य देख कर अचंभित हो गए।

डाइनिंग टेबल पर बेखबर, बेसुध, मदहोश विकास और ऋतु अर्धनग्न एक दूसरे को चूमते और चिपकते खाना खा रहे थे। दृश्य देख स्टोर अफसर बिना संदेश दिए वापस लौट गया। होटल स्थल पर पहुंचते विकास और ऋतु की प्रेम लीला जग जाहिर हो गई। अब हर किसी की जुबान पर विकास और ऋतु के चर्चे थे और नमक मिर्च लगा कर बढ़-चढ़ कर बताये जा रहे थे।

मैनेजिंग डायरेक्टर ने फिर फोन किया कि विकास से जरूरी बात करनी है, उससे फोन तुरंत करवाओ। स्टोर अफसर ने मैनेजिंग डायरेक्टर को भी विकास और ऋतु का प्रेमालाप बता दिया। यह सुन मैनेजिंग डायरेक्टर ने बौखला कर कहा कि उसका संदेश अभी पहुंचाओ और कल सुबह दोनो मेरे ऑफिस में होने चाहिए।
स्टोर अफसर एकदम झटपट भागते हुए गेस्ट हाउस पहुंचा। वहां कोई नही था। विकास और ऋतु वहां से जा चुके थे। स्टोर अफसर ने मैनेजिंग डायरेक्टर को बता दिया कि दोनों गेस्ट हाउस में नही हैं और उनका सामान भी नही है।

यह सुन मैनेजिंग डायरेक्टर का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया। तुरंत एचआर हेड को बुला कर दोनों को नौकरी से निकालने का आदेश दिया।

ऋतु अगले दिन ऑफिस नही गई। ईमेल से विकास पर यौन शौषण का आरोप लगा कर लंबी छुट्टी मांगी। गेस्ट हाउस में विकास द्वारा बलात्कार का आरोप लगाया। विकास ऑफिस पहुंचा परंतु उसको अपने केबिन में बैठने नही दिया। ऑफिस के बाहर वह मैनेजिंग डायरेक्टर के आने की प्रतीक्षा करने लगा। मैनेजिंग डायरेक्टर आये लेकिन विकास से नही मिले। पूरे प्रकरण पर विचार किया और एचआर हेड से विचार विमर्श किया। बलात्कार के आरोप पर यौन शौषण समिति का गठन किया और दोनों को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया।

बलात्कार का आरोप सुन विकास ने ऋतु को फोन किया लेकिन उसका फोन बंद मिला। वह उसके घर गया लेकिन ऋतु ने मिलने से मना कर दिया। घर पर ऋतु के माता-पिता के सामने उसने बात करना उचित नही समझा। वह घर की गली पर ऋतु की प्रतीक्षा करने लगा लेकिन ऋतु तीन दिन तक घर से बाहर नही निकली। तीन दिन बाद ऑफिस में दोनों ने यौन शौषण समिति में पेश होना था। ऋतु घर से निकली तब विकास ने अपनी कार उसकी कार के सामने लगा कर उसका रास्ता रोक कर बलात्कार के गलत आरोप लगाने की वजह पूछी। ऋतु ने शोर मचाया औऱ कुछ लोग एकत्रित हो गए। विकास किसी लफड़े में नही पड़ना चाहता था इस कारण वह चुपचाप रास्ते से हट गया।

ऑफिस में समिति के सामने दोनों एक दूसरे पर बरस पड़े।
विकास - तुमने बलात्कार का गलत आरोप क्यों लगाया?
ऋतु - आरोप सही है। गेस्ट हाउस में मुझे अकेली देख तुमने मेरे कपड़े फाडे और जबरदस्ती शील भंग किया।
विकास - मैंने कोई जबरदस्ती नही की। तुमने अपनी मर्जी से किया है। तुम कोई बच्ची नही हो। चालीस साल की हो रही हो। दो-दो बॉय फ्रेंड पाल रखे हैं। गुलछर्रे उनके साथ और इल्जाम मेरे ऊपर। मैंने तुझे कौन सा रस्सी से बांध रखा था। हट्टी कट्टी मुश्तण्डी है तेरे से जबरदस्ती कौन कर सकता है।
ऋतु  - नारी कमजोर और अबला होती है। तुमने मेरा फायदा उठाया है। व्यक्तिगत लांछन मत लगाओ। मेरा बॉय फ्रेंड है या नही इसका कोई अर्थ नही है जब तुमने जबरदस्ती की है।
एचआर हेड - कृपा करके व्यक्तिगत लांछन मत लगाइये। सिर्फ मुद्दे पर बात कीजिये।
विकास - व्यक्तिगत लांछन नही लगा रहा हूं सिर्फ यह बता रहा हूं कि जो लड़की दो-दो बॉय फ्रेंड रखती है वह दूध की धुली नही है। उनके साथ क्या करती है खुद समझ लो। मैंने कोई जबरदस्ती नही की सिर्फ बहती गंगा में हाथ धोए हैं। जरा सा हाथ लगाया खुद शुरू हो गई। व्हिस्की पी, मैंने गले में तो जबरदस्ती डाली नही।
ऋतु - यदि मुझे इस समिति से इंसाफ नही मिला तब मैं पुलिस में केस दर्ज करवाउंगी।
विकास - उस स्टोर अफसर से पूछ लो कि मैंने जबरदस्ती की या सब आपसी रजामंदी से हुआ। उसने सब देखा है।
मैनेजिंग डायरेक्टर ने दोनों से अलग-अलग बात की। ऋतु बलात्कार की बात पर अड़ी हुई थी और विकास आपसी रजामंदी पर अड़ा हुआ था।

अपने अनुभव के आधार पर मैनेजिंग डायरेक्टर ने फैसला सुनाया - ऋतु जो भी सच है सिर्फ तुम और विकास जानते हो। कंपनी में तुम दोनों बदनाम हो चुके हो। तुम अपनी शिकायत वापस लो। इस शिकायत का पूरा रिकॉर्ड तुम दोनों के सामने नष्ट कर देते हैं। ऋतु और विकास तुम दोनों इसी समय इस्तीफा दो और कभी इस ऑफिस में नजर नही आना। पुलिस में जाना चाहो और इस केस को आगे बढ़ाना हो, इस ऑफिस से बाहर जाकर करो।

ऋतु और विकास ने फौरन त्यागपत्र मैनेजिंग डायरेक्टर को दिया जिसे फौरन मंजूर किया गया।
ऑफिस से बाहर आकर विकास ने ऋतु का हाथ पकड़ कर रास्ता रोका - तेरे मन में क्या है यह तो बता दे?
कुटिल मुस्कान के साथ ऋतु ने जवाब दिया - "शादी कर ले मुझसे।"
यह सुन कर विकास के होश उड़ गए - क्या कह रही हो?"
ऋतु - शादी कर लो मुझसे।
विकास - मैं शादीशुदा हूं, दो बच्चे है।"
ऋतु - छोड़ दे उनको। मैं तैयार हूं।"
विकास - तेरे दो बॉय फ्रेंड है, किसी से भी कर ले। मेरी ज़िंदगी क्यों खराब करने पर तुली है।
ऋतु - जब बात खुल गई है तब मैं अकेले बदनामी क्यों मोल लूं। तुमने मजे किये तो भुगतो।
विकास - इतनी गिरी हुई हो सोचा नही था। मेरे ऊपर इल्जाम लगा कर क्या मिला तुमको?
ऋतु - स्टोर अफसर ने देख लिया और खबर आग की तरह फैली है तब मैं लड़की होकर चुपचाप क्यों सहूं? चुप रहती तो तुम मेरा गलत फायदा उठाते। यह नही हो सकता। भुगतना तो तुम्हे पडेगा ही।"
विकास तिलमिला कर रह गया और ऋतु ने कुटिल मुस्कान के साथ कार स्टार्ट की।


Post a Comment

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी , खुशी की घड़ियां मना रहे हैं करें बयां क्या सिफ़त तुम्हारी , जबां में ताले पड़े हैं। सु...