Friday, July 28, 2017

भोगे भोग घटे नही तृष्णा


भोगे भोग घटे नही तृष्णा, भोग-भोग फिर क्या करना
चित में चेतन करे चांदना, धन माया का क्या करना

धन से भय विपदा नही मांगे, झूठा भरम नही करना
कर संतोष सुखी हो रहिये, पच-पच मरना चाहिए

सुमरण करें सदा ईश्वर का, साधु का सम्मान करें
कम हो तो संतोष करें नर, ज्यादा हो तो दान करें

जब-जब मिले भाग जैसा, संतोषी ईमान करें
उल्टा-पुल्टा घणा बखेड़ा, जुल्मी बेईमानी करें

निर्भय जीना निर्भय मरना, मोहन डरना चाहिए
सादा जीवन सुख से जीना, अधिक इतराना नही चाहिए

भजन सार है इस दुनिया में, कभी बिसराना नही चाहिए
Post a Comment

जगमग

दिये जलें जगमग दूर करें अंधियारा अमावस की रात बने पूनम रात यह भव्य दिवस देता खुशियां अनेक सबको होता इंतजार ...