Saturday, July 29, 2017

सादा जीवन सुख से जीना


सादा जीवन सुख से जीना, अधिक इतराना चाहिए
भजन सार है इस दुनिया में, कभी बिसरना नही चाहिए

मन में भेद भाव नही रखना, कौन अपना कौन पराया
ईश्वर से सच्चा नाता है और सभी झूठा सपना

गर्व गुमान कभी करना, गर्व रहे गिरे बिना
कौन यहां पर रहा सदा से, कौन रहेगा सदा बना

सभी भूमि गोपाल लाल की, व्यर्थ झगड़ना चाहिए
दान भोग और नाश तीन गति धन की चौथी कोई

जतन करणता पच-पच मर गया, संग ले गया कोई
एक लख पूत सवा लख नाती, जाने जग में सब कोई

रावण की सोने की लंका, संग ले गया कोई

सुख से रहना खूब बांटना, भर-भर रखना चाहिए
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